Top 10 ways to do Riyaz (Music Practice) Music Practice

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Top 10 Ways to do Riyaz (Music Practice)

🎹🎵Friends, in a previous post, I talked about Riyaz in detail, in that I told what is Riyaz? What are the benefits of doing Riyaz? What are the disadvantages of not doing Riyaz, and in how many ways should Riyaz be done? All this in that post I told you in detail, if you have not read that post yet, you must read it, you will get a lot of knowledge, and in this post I will talk about Riyaz in more detail, that to do Riyaz And how many main ways are there, by which you can become a good singer, musician or instrumentalist by doing Riyaz, and you can get success in the field of music, so let us now tell you in what ways we should do Riyaz :- –

Main Ways of the Riyaz 


   (1) Riyaz of S Note : – Riyaz of S, first of all, you should do Riyaz of S vowel, that Riyaz is such that you keep mixing sound by pressing S vowel and the longer you can mix it with voice, the more Try to mix the voice late, by doing this Riyaz your S note will be firm and your stamina will also increase,

   (2) Riyaz of Kharaj :- After that, the Riyaz of the swaras of Kharaj means Mandra Saptak(Lower Octave), the sound of the vowels of this octave is very thick and heavy. By doing Riyaz of the vowels of this octave, you will benefit that your throat will  perpear ready to sing the highest pitch, and you will can easily sing on the notes of the highest octave,

   (3) Omkar’s Riyaz :- In Omkar’s Riyaz, you have to say Omkar on every tone, this Riyaz also prepares your throat well. For more information about Omkar’s Riyaz, you can also watch videos on YouTube from Omkar  There are many videos uploaded on related YouTube, by watching which you will get a lot of knowledge,

   (4) Riyaz of the Notes of the middle octave :- After that, you should do the riyaaz of the notes of the middle ie which is the octave between the Mandra and the Tara Saptak and at the time of the Riyaz of that octave, you can add some notes of the Mandra Saptak and taar Saptak Go on adding some notes to the notes of the octave as far as you can easily sing, the benefits of this Riyaz for you can identify the sound of the Notes of all the three octaves, in the beginning level you practice the alkars in this octave and as you keep learning you will  In this octave, the words of songs, bhajans, ghazals or Gurbani can also be sung,

   (5) Riyaz of Humming :- In this Riyaz you have to suppress the notes of any instrument you practice on whether it is Harmonium, Keyboard, Piano or Tanpura, but with them you have  do not have to speak, but the voice of  to be revealed through the mouth, doing this ritual will also bring sweetness in your singing,

   (6) Riyaz of Aalap :- In the Riyaz of Aalap, you have to play  in S R G M P D N S° but in that you do not have to say  S  R G M P D N S°, but instead you have to Mouth ( Aa Aa Aa Aa Aa off). to be revealed,

   (7) Riyaz of S and P: – In the Riyaz of S and P, you have to do it by pressing the S and P notes, in this you can sing, play and play any song, Ghazal, Bhajan or Gurbani. You can also sing or play, by doing this Riyaz also strengthens your hold on the vocals and you also get to know how high the voice of which vowel is and how low the voice is, you will also benefit a lot by doing this Riyaz. It happens,,

   (8) Riyaz of consonant characters :– In this Riyaz, whatever instrument you play, such as, Harmonium, keyboard, piano or tanpura, you have to play in S R. G M but instead of S R G M you have to Aa Ee O Ao. As the letters have to be pronounced with the mouth,

(9) Riyaz of higher Octave or high notes :– While doing these Riyaz, there is a pressure on your stomach and chest, that is why you are stressed for doing Riyaz of Kharaj’s notes again and again because in future do not face any problem in singing on higher Octave,


   (10) Riyaz of all the three octaves: – After that, you should do Riyaz of all the three octaves ie Mandra, Madhya and Tara Saptak together, for that what you have to do is that you have to play Alankar with the middle octave and the chord of the octave. As far as your voice goes, you have to do Riyaz of ornaments and after that, now coming from the middle octave to the notes of the Mandra octave, you have to do Riyaz till where your voice comes, you have two benefits of doing this Riyaz. First, the sound of vowels will be recognized, what is the sound of which vowel, secondly the speed of your fingers will also increase,






Note: – There may be mistakes in translation, so if you do not understand anything, then comment me (English, Hindi or Punjabi), no matter which country you are from, I will try my best to answer your comment, and in future I will try to improve these mistakes too — Kulwinder Jolly {Mr.Jolly}



You can also Visit and Subscribe to My YouTube channel ‘Mr.Jollys Music Classes’ to See Knowledgeful Videos of Theory and Paractical related to Music,



रियाज़ करने के मुख्य 10 तरीके

🎵🎹दोस्तो पिछली एक पोस्ट में मैंने रियाज़़ के बारे में डिटेल से बात की थी, उसमें मैंने बताया था कि रियाज़ क्या होता है? रियाज़ करने के क्या फायदे हैं? रियाज़ ना करने के क्या नुकसान हैं, और रियाज़ कितने तरीकों से करना चाहिए? यह सब उस पोस्ट में मैंने आपको डिटेल से बताया था, अगर आपने अभी तक वह पोस्ट नहीं पड़ी आप उसे ज़रूर पढ़ें आपको बहुत ज़्यादा नॉलेज मिलेगी, और इ़स पोस्ट में मैं रियाज़ के बारे में और भी डिटेल से बात करुंगा, कि रियाज़ करने के और मुख्य कितने तरीके होते हैं जिनसे आप रियाज़ करके एक अच्छे सिंगर, संगीतकार या वाद्य यंत्र वादक बन सकते हैं, और म्यूज़िक के फील्ड में कामयाबी पा सकते हैं तो चलिए अब आपको बताते हैं कि हमें रियाज़ किन-किन तरीकों से करना चाहिए :–

         रियाज़ करने के मुख्य तरीके

(1) स का रियाज़ :- स का रियाज़, आप सबसे पहले स स्वर का रियाज़ करें, वो रियाज़ ऐसे़ ऐसे होता है कि आप स स्वर को दबाकर उससे आवाज़ मिलाते रहें और जितनी ज़्यादा देर तक आ़प उससे आवाज़ मिला सकते हैं उतनी ज़्यादा देर आवाज़ मिलाने की कोशिश करें, इस रियाज़ को करने से आपका स स्वर पक्का होगा और आपका जो स्टेमिना है वह भी बढ़ता जाऐगा,
(2) ख़रज का रियाज़ :–उसके बाद है, ख़रज यानी मंद्र सप्तक के स्वरों का रियाज़, इस सप्तक के स्वरों की आवाज़ काफी मोटी और भारी होती है इस सप्तक के स्वरों का रियाज़ करने से आपको ये फायदा होगा कि आपका गला उँचें से उँचे स्वर लगाने के लिए तैयार हो जाता है, और आप तार सप्तक के स्वरों पे आसानी से गा पाते हैं,
(3) ओंमकार का रियाज़ :–ओंमकार के रियाज़ में आपको हर स्वर पे ओंमकार बोलना होता है इस रियाज़ से भी आपके गले की अच्छी तैयारी होती है ओंमकार के रियाज़ की अधिक जानकारी के लिए आप यूट्यूब पर वीडियोस भी देख सकते हैं ओंमकार से रिलेटेड यूट्यूब पर बहुत सारे वीडियोस अपलोड हैं, जिनको देखने से आपको बहुत ज़्यादा नौलज मिलेगी,
(4) मध्य सप्तक के स्वरों का रियाज़ :–उसके बाद आप मध्य यानी जो मंद्र और तार सप्तक के बीच वाला सप्तक होता है उस सप्तक के स्वरों का रियाज़ करें और उस सप्तक के रियाज़ के समय आप कुछ स्वर मंद्र सप्तक के और और कुछ स्वर तार सप्तक के जहाँ तक आप आसानी से गा सकें वो स्वर भी जोडते चलें जाएं तांकि आपको तीनों सप्तक के स्वरों की आवाज़ की पहचान हो सके, बिगनिंग लेवल में आप इस सप्तक में अलकारों का रियाज़ करें और जैसे जैसे आप सीखते जाएँ तो आप इस सप्तक में गीत, भजन, गज़ल या गुरबाणी के शब्द भी गा सकते हैं,
(5) हमिंग (Humming) का रियाज़ :–इस रियाज़ में आपको आप जिस भी वाद्य यंत्र पर रियाज़ करें चाहे वो हरमोनियम, कीबोर्ड, पियानो या तानपुरा हो उसके स्वरों को तो दबाना है लेकिन उनके साथ आप को ( स रे ग म प ध नी सं ) नहीं बोलना है बल्कि हूँ हूँ हूँ की आवाज़ मुंह से प्रकट करनी है ये रियाज़ करने से भी आपकी गायकी में मिठास आऐगी,
(6) आलाप का रियाज़ :– आलाप के रियाज़ में आपको स रे ग म प ध नि सं तो बजाना होता है लेकिन उसमें आपको स रे ग म प ध नी सं बोलना नहीं होता है बल्कि उसकी जगह आपको आ आ आ आवाज़ मुंह से प्रकट करनी होती है,
(7) स और प का रियाज़ :– स और प के रियाज़ में आपको स और प स्वरों को दबा कर उसका रियाज़ करना होता है इसमें आप अलंकार भी गा, बजा सकते हैं और कोई गीत, गज़ल,भजन या गुरबाणी का शब्द भी गा या बजा सकते हैं,ये रियाज़ करने से भी आप की स्वरों पे पकड़ मजबूत होती है और आपको ये भी पता चलता है कि किस स्वर की आवाज़़ कितनी उंची और किस स्वर की कितनी नीचे है, यह रियाज़ करने से भी आपको काफी फायदा होता है,,
(8) व्यंजनों (वर्णों) का रियाज़ :– इस रियाज़ में आप जो भी वाद्ययंत्र बजाते हैं जैसे कि,कीबोड,पिआनो या कि तानपुरा आपको स रे ग म तो बजाना होता है लेकिन उसमें स रे ग म की जगह आपको आ ई ऊ ऐ ओ जैसे वर्णों का मुंह से उच्चारण करना होता है,
(9) तार सप्तक या ऊंचे स्वरों का रियाज़ :– आपको तार सप्तक के स्वरों का रियाज़ करने के लिए तार सप्तक एक-एक स्वर पर रुक-रुक के रियाज़ करना होता है, इनकी आवाज़ कुछ ऊंची होती है और इस लिए इन स्वरों पर रियाज़ करते वक़्त पेट और छाती का ज़ोर लगता है इसी वजह से आपको ख़रज के स्वरों का रियाज़ करवाने पे ज़ोर दिया जाता है तांकि आपको ऊंचे स्वरों पे गाने में कोई दिक्कत ना आए,
(10) तीनो सप्तक का रियाज़ :– उसके बाद आप तीनो सप्तक यानी मंद्र, मध्य और तार सप्तक के स्वरों का एक साथ रियाज़ करें उसके लिए आपको क्या करना है कि मध्य सप्तक के स स्वर से आपको अलंकार बजाना है और तार सप्तक के स्वरों तक जहां तक आपकी आवाज़ जाती है वहां तक अलंकारों का रियाज करना है और उसके बाद अब मध्य सप्तक से आते हुए मंद्र सप्तक के स्वरों तक जहां तक भी आपकी आवाज़ आती है तो वहां तक आपको रियाज़ करना है यह रियाज़ करने के आपको दो फायदे होंगे पहला तो स्वरों की आवाज़ की पहचान हो जाऐगी कि कौन से स्वर की कैसी आवाज़ कैसी है दूसरा आपकी फिंगरस की स्पीड भी बढ़ जाएगी,




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