Easiest way to learn Ragas of Indian classical music

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Easiest way to learn Ragas of Indian classical music 

 
 
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🎹Friends, whenever someone learns a raga in Indian music, he definitely faces a problem, and I also came across that problem, and that problem is that we prepare any raga very well.  But when Guru ji goes to recite that raga, we forget, the biggest reason for this is that we want to learn music very quickly, but music is such a thing that it cannot be learned quickly.  It takes some time to learn this.  That’s why every music master repeatedly tells his disciple to be patient, and this is also true.  The basic mantra of learning music is that if you learn music quickly, you will be able to learn late and the more slowly you learn, the sooner you will come to music.  Well, now we talk about how to learn a raga easily, so the problem with learning this raga is because whenever you learn a raga, you try to learn it all at once.  But this way of learning raga is absolutely wrong.  If you want to learn any bandish of any raga quickly and easily, then it has to be learned in pieces, and that way is that whenever you learn any bandish of any raga.If you learn it, then learn to sing and play it in pieces little by little, as if I see you the example of a bandish of Raga Bhairav, I explain to you that as if you have to prepare a bandish and whose notation has the lyrics :-G M d d । M P M G । r r M G । r r S  — and its words are :- Ja S Go S । V an  Shi  S  । Wa S Le S । L L Na  S, so the first thing you have to do is to take the first four words (G  M d d ) of this notation of this band and prepare it well by repeating these over and over again on the harmonium.  For example, you have to sing and play these words again and again, remember that when you sing or play these lyrics, your voice should match the notes, and when these four vowels of yours are well formed, its  after you prepare the next four notes first we took four Notes and the next four notes of this notation are as M P M G you now prepare these four notes well and when these four notes you have prepared  Sing and play these eight notes together, and when you have prepared these eight notes well, you take the next four notes again and those are four notes, in r r M G again and again you keep singing and playing these four notes,  Until these four notes sit well in your mind and on your throat, and when you have prepared these four notes, sing and play the twelve notes of the last twelve and when these twelve vowels are ready then the next four  Take the notes and when you start singing and playing these four notes well, then you sing and play the sixteen notes of these sixteen together, and when you start singing and playing these sixteen notes, then take the next four notes again.  Take it and in the same way you prepare both the permanent and the antar of the bandisha well, and when you start singing and playing the notation of the raga well, then you can say the words of this bandish on four such notes.  Learn to sing and play it and in this way, if you prepare any difficult bandish of any raga, then you will learn to sing and play it in a 100% well, friends, any difficult bandish of any raga  This is the best formula to learn easily and quickly, and this is how everyone learns and will continue to learn, and in the end I would like to say one thing to you that I am very glad that you are on my YouTube channel Mr.Jolly’s Music Classes’ videos and like my post very much, but you do not tell me any question or music related problem by commenting, whose solution I can tell you, then you must comment me I will be happy
 
Note:- J S Go S ( S ) It means you have to say a a a Notes on the previous notes
 

No

 

        Definition of Raga, or What is Raga ? D

 

 Friends, the ragas are the basis of Indian classical music.  The true form of Indian classical music can be represented only by ragas.  Friends, in music, the raga is made from naad to swar, swara to saptak, saptak to thatth and Thaats the earliest mention of the word raga is found in a text called Brehdesi, composed by Pandit Matang in the seventh century.  Earlier, caste-singing was promoted in music.  Let us now know what is the definition of raga or what is called a raga?  Friends, raga is called that beautiful composition of notes and characters which gives pleasure to the listeners, Apinava Raga Manjari Granth also defines the raga in this way.  That is, the sound in which there is beauty due to tone and color, which paints the human mind in the color of joy or is pleasing to the human mind, that special composition of that sound is called raga.

 

        Definition of Thaat, or What is Thaats?

 

 That group of seven notes, in which seven notes are full tone or half tone in one way or the other, from which the raga can be produced,  it is called Thaat, and in Sanskrit texts thaat is called mail.  Pandit Ahobal in his treatise Sangeet Parijat has defined mel in such a way that mel is that group of swaras from which also raga can be produced.  Because each raga originates from some or the other Thaats, it is called Janaka in Indian music.  And that is why there is a father-son relationship of Thaat and Raag in music.

 

 

 
 
 

भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग सीखने के सबसे आसान तरीका 

 
 
             
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🎹दोस्तो जब भी कोई इंडियन क्लासिकल म्यूजि़क में राग सीखता है तो उसको एक प्रॉब्लम ज़रूर आती है,और वो नप्रॉब्लम मुझे भी आई थी,और वह प्रॉब्लम यह है कि हम किसी भी राग की तैयारी तो बड़े अच्छे तरीके से कर लेते हैं। लेकिन जब उस राग को गुरू जी सुनाने जाते हैं तो भूल जाते हैं, इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम संगीत को बहुत जल्दी-जल्दी सीखना चाहते हैं, लेकिन संगीत ऐसी चीज़ है कि इसको जल्दी नहीं सीखा जा सकता है। इस को सीखने में कुछ वक्त लगता है। इसलिए हर संगीत का गुरु अपने शिष्य से धैर्य रखने के लिए बार-बार बोलता है, और यह बात सच भी है। संगीत को सीखने का मूल मंत्र भी यही है कि अगर आप संगीत को जल्दी-जल्दी सीखेंगे तो आप लेट सीख पाएंगे और जितना धीरे-धीरे सीखेंगे आपको संगीत उतना ही जल्दी आएगा। खैर, अब हम बात करते हैं कि राग को आसानी से कैसे सीखा जाए, तो यह जो राग सीखने में प्रॉब्लम आती है, इसका कारण यही है कि आप लोग जब भी राग सीखते हैं, आप उसको एक ही बार पूरा सीखने की कोशिश करते हैं, लेकिन राग सीखने का यह तरीका बिल्कुल गलत है। अगर किसी भी राग की किसी भी बंदिश को जल्दी और आसानी से सीखना है तो उसे टुकड़ों में सीखना पड़ता है, और वो तरीका यह है कि आप जब भी किसी राग की किसी भी बंदिश आ
को सीखें तो उसको थोड़ा-थोड़ा करके टुकड़ों में गाना और बजाना सीखें, जैसे कि मैं आपको राग भैरव की एक बंदिश की मिसाल देखकर मैं आपको समझाता हूं कि मानलो आपको कोई बंदिश तैयार करनी है और जिसकी नोटेशन के बोल हैं:–ग म धॖ धॖ । म प म ग ! रेॖ रेॖ म ग । रेॖ रेॖ स –, और इसके शब्द हैं :– जा S गो । वं S शी — । वा S ले S । ल ल ना –, तो सबसे पहले आपने क्या करना है कि इस बंदिश की इस नोटेशन के जो पहले वाले चार बोल हैं उनको लेना है और हारमोनियम पर बार-बार इन्हीं को रिपीट करते हुए अच्छी तरह तैयार करना है। जैसे कि, ग म धॖ धॖ आपको इन्हीं बोलों को बार-बार गाना और बजाना है याद रखें कि जब आप इन बोलों को गाएं या बजाऐं तो आपकी आवाज़ स्वरों से बिलकुल मिलनी चाहिए, और जब आपके ये चार स्वर अच्छी तरह तैयार हो जाएँ उसके बाद आप चार स्वर अगले तैयार करलें पहले हमने चार स्वर लिए थे ग म धॖ धॖ और इस नोटेशन के अगले चार स्वर हैं म प म ग आप अब इन चार स्वरों को अच्छी तरह से तैयार कर लें और जब ये चार स्वर आप तैयार करलें तो इन आठों स्वरों को इकट्ठे गाएँ और बजाएँ, और जब ये आठ स्वर आप अच्छी तरह तैयार करलें तो आप अगले चार स्वर फिर से ले लें और वो चार स्वर हैं, रेॖ रेॖ म ग आप बार बार इन्हीं चार स्वरों को गाते और बजाते रहें, जब तक ये चारों स्वर आपके दिमाग में और आपके कंठ पे अच्छी तरह से ना बैठ जाएँ,और जब ये चार स्वर आप तैयार करलें तो अप पिछलें बारह के बारह स्वरों को इकठ्ठा गाईए और बजाईए और जब ये बारह स्वर तैयार हो जाएँ तो अगले चार स्वर ले लीजिए और जब ये भी चार स्वर आप अच्छी तरह गाने और बजाने लग जाएँ तो आप इन सोलह के सोलह स्वरों को इकठ्ठा गाएँ और बजाएँ,और जब ये सोलह स्वर आप गाने और बजाने लग जाएँ तो अगले चार स्वर फिर ले लें और ऐसे ही आप बंदिशा की स्थाई और अंतरा दोनों को अच्छी तरह तैयार करलें,और जब आप राग की स्थाई और अंतरे की नोटेशन को अच्छी तरह गाने और बजाने लग जाएं तो आप ऐसे ही चार चार स्वरों पे इस बंदिश के बोलों यानी शब्दों को गाना और बजाना सीख लें और इस तरह अगर आप किसी भी राग की कोई भी मुश्किल से मुश्किल बंदिश को तैयार करेंगे तो आप उसे सौ प्रतिशत अच्छी तरह स्वर में गाना और बजाना सीख जाएंगे दोस्तो किसी भी राग की किसी भी मुश्किल से मुश्किल बंदिश को आसानी से और जल्दी सीखने का यही बेस्ट फार्मुला है, और ऐसे ही सब लोग सीखते हैं और सीखते रहेंगे,और अंत में मैं आप से एक बात कहना चाहूँगा कि मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि आप मेरे यू टयूब चैनल मि.जोलीस म्युजि़क कलालस’ के के वीडियोस को और और मेरी बलोग पोस्ट को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं पर आप मुझे कोई कमेंट करके अपना कोई सवाल या संगीत से सम्बंधित समस्या नहीं बताते जिसका समाधान मैं आपको बता सकूँ तो आप मुझे कमेंट ज़रूर करें मुझे खुशी होगी।
 
 

   राग की परिभाषा क्या है, या राग किसे कहते हैं? 

 
दोस्तो राग जो हैं वो भारतीय शत्रीय संगीत का आधार हैं। भारतीय शत्रीय संगीत का असली रूप केवल रागों द्वारा के ही दर्शाया जा सकता है। दोस्तो संगीत में नाद से स्वर, स्वर से सप्तक, सप्तक से थाठ और थाठों से राग बने हैं, राग शब्द का सबसे पहला उल्लेख सातवीं शताब्दी में पंडित मतंग द्वारा रचित ब्रहदेसी नामक एक ग्रंथ में मिलता है। इससे पहले, संगीत में जाति-गायन का प्रचार किया जाता था। आइए अब जानते हैं कि राग की परिभाषा क्या है या राग किसे कहते हैं? दोस्तो राग स्वरों और वर्णों की उस सुंदर रचना को कहते हैं जिससे सुनने वालों को आनंद की अनुभूति होती हो अपिनव राग मंजरी ग्रंथ भी राग को इस प्रकार परिभाषित करता है। अर्थात् स्वर और वर्ण के कारण जिस स्वर में सौन्दर्य होता है, जो मनुष्य के मन को आनंद के रंग में रंग देता है या मनुष्य के मन को भाता है, उस ध्वनि की वह विशेष रचना राग कहलाती है।
 
 
 

    थाठ की परिभाषा क्या है, या थाठ किसे कहते हैं?

 
सात स्वरों का वह समूह,जिसमें किसी न किसी रूप में शुद्ध या विकृत सात स्वर हों, जिससे राग की उत्पत्ति की जा सके, उसे थाठ कहते हैं संस्कृत ग्रंथों में थाठ को मेल कहा गया है। पंडित आहोबल ने अपने ग्रंथ संगीत पारिजात में मेल की परिभाषा इस प्रकार दी है, कि मेल स्वरों का वह समूह है जिससे राग उत्पन्न किया जा सकता है। क्योंकि प्रत्येक राग की उत्पत्ति किसी न किसी थाठ से होती है, इसलिए उसे भारतीय संगीत में जनक कहा जाता है। और इसीलिए संगीत में थाठ और राग का पिता-पुत्र का रिश्ता है।
 
 
 
 
 
       

 

 

 

 

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